Diwali 2020: जाने आखिर दिवाली पर दिये क्यों जलाए जाते हैं?

हम बिना दिये के दिवाली का त्यौहार मानाने की सोच भी नहीं सकते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं की आखिर दिवाली पर दिये क्यों जलाए जाते हैं?

जैसे की हम सभी जनते हैं, रौशनी, खुशियों, और अपनेपन का त्यौहार दिवाली काफी ज़्यादा नज़दीक आ गयी है, इस पर्व की शुरुवात धनतेरस अर्थात कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि से हो जाती है। इस साल दिवाली 14 नवंबर को पड़ रही है और हर कोई दिवाली की तैयारी में लगा हुआ है, सभी अपने-अपने घरों की साफ सफाई कर रहे हैं, ताकि दिवाली के दिन वो अपने घरों को दिये से रोशन कर सके। दिवाली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के पूजन से पहले हर जगह दिये जलाए जाते हैं। हम बिना दिये के दिवाली का त्यौहार मानाने की सोच भी नहीं सकते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं की आखिर दिवाली पर दिये क्यों जलाए जाते हैं? अगर नहीं, तो अब आपको परेशान होने की ज़रूरत नहीं है क्यूंकि आज के लेख में हम आपको बताएँगे के आखिर दिवाली पर क्यों दिए जलाए जाते हैं।

दिवाली पर दिये क्यों जलाए जाते हैं?

यह रहा पारंपरिक कारण :

दिवाली के कुछ दिनों पहले दशहरे का त्यौहार मनाया जाता है, दशहरा का त्यौहार भगवान श्री राम के हाथों रावण के मारे जाने पर मनाया जाता है। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत की तरह मनाते हैं। जैसे ही हम सब जानते हैं की, माता सीता का अपहरण करने के बाद भगवान राम और राक्षस रावण के बेच लंबा युद्ध चला था और आखिर में भगवान राम ने रावण को मार डाला था। रावण को मारने के बाद भगवान राम ने उनके भाई विभीषण का लंका में राज्याभिषेक किया और कुछ दिन वही रुके।

दिये क्यों जलाए जाते हैं

उसके बाद भगवन राम विभीषण द्वारा दिए गए  रावण के पुष्पक विमान से वापस अयोध्या लौटे। ये वही पुष्पक विमान था, जो रावण ने कुबेर से छीन लिया था। भगवन राम को अयोध्या लौटते समय आधी रात हो गयी थी, तो अंधेरे में विमान कहीं खो न जाए, या कहीं और न उतर जाए, इसके लिए अयोध्यावासियों ने दिये जलाए। उस समय यह रिवाज बन गया है की, भगवान राम के वापसी के इस दिन सभी भक्त अपने-अपने घरो को दिए से रोशन करते हैं।

इसके अलावा, दिवाली के दिन को भगवान राम के अयोध्या वापस लौटने की खुशी के रूप में भी मनाया जाता है, तो इस ख़ुशी को मानाने के लिए सभी भक्तजन घरों में दिए जलाते हैं।

यह रहा वैज्ञानिक कारण :

दीवापली पर दिए जलाने के पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी जिम्मेदार है। दरअसल ये वो समय होता है जब मौसम में अचानक से बदलाव होता है। गर्मी के बाद शरद ऋतु का आगमन होता है। मौसम के इस बदलते पड़ाव पर मच्छरों का प्रकोप एकदम से शुरू होता है। ऐसे में वैज्ञानिक तक इस बात को मानते हैं कि सरसों के तेल के जलने से जो धुआं वातावरण में घुलता है उसकी खुशबू मच्छरों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

दिये क्यों जलाए जाते हैं

दिये जलाने का वैज्ञानिक कारण भी मौजूद है। ऐसा कहा जाता है की, जिस समय दिवाली का पर्व पढता है उस समय मौसम में बदलाव होता है यानि बारिश के बाद ठंड के मौसम का आगमन होता है। इस तरह बदलते मौसम में मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। ऐसे में वैज्ञानिको का कहना है की, दिये जलाने से मच्छर दिये की तरफ आकर्षित होते हैं और लौ से जलकर मर जाते हैं।

 

दिवाली पर दिये क्यों जलाए जाते हैं, ये सवाल हम सब के मन में एक बार ज़रूर आता है, आज के लेख में हमने आपके इस सवाल का जवाब दिया है। आप दिवाली में दिये जलाने के इन कारणों को अपने बच्चो और परिवार वालों को ज़रूर बताएं और धूमधाम से दिवाली का शुभ पर्व मनाए।