Hindi Motivational Kahaniya : “जब सच लगे झूठ और झूठ लगे सच”

मैनेजर नेँ उसकी बात से साफ इंकार कर दिया और कहा,-” कि मैनेँ जो कुछ भी रजिस्टर मेँ लिखा है. वही सच है।”
Hindi motivational kahaniya. विक्रम तीन साल से एक ही होटल पर काम कर रहा था।एक दिन विक्रम रात मेँ नशे मेँ धुत हो गया। ऐसा पहली बार हुआ था। मैनेजर नेँ इस घटना को रजिस्टर मेँ इस तरह दर्ज किया, ” विक्रम आज रात नशे मेँ धुत था।”
विक्रम नेँ यह बात पढ़ ली। विक्रम जानता था कि इस एक वाक्य से उसकी नौकरी पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इसलिए वह मैनेजर के पास गया, माफी मांगी और मैनेजर से कहा कि उसनेँ जो कुछ भी लिखा है, उसमेँ आप ये और लिख दीजिये कि ऐसा तीन साल मेँ पहली बार हूआ है, क्योँकि पुरी सच्चाई यही है।
मैनेजर नेँ उसकी बात से साफ इंकार कर दिया और कहा,-” कि मैनेँ जो कुछ भी रजिस्टर मेँ लिखा है. वही सच है।”
कुछ  दिनों बाद विक्रम की रजिस्टर भरनेँ की बारी आयी। उसनेँ रजिस्टर मेँ लिखा-” आज की रात मैनेजर नेँ शराब नहीँ पी है।”
मैनेजर नेँ इसे पढ़ा और विक्रम से कहा कि इस वाक्य को आप या तो बदल देँ या पूरी बात लिखनेँ के लिए आगे कुछ और लिखेँ, क्योँकि जो लिखा गया था, उससे जाहिर होता था कि मैनेजर हर रोज रात को शराब पीता था।
विक्रम नेँ मैनेजर से कहा कि उसनेँ जो कुछ भी रजिस्टर मेँ लिखा है, वही सच है। दोनोँ बातेँ सही हैँ, लेकिन दोनोँ से जो संदेश मिलता है, वह झूठ के सामान है।
दोस्तों इस काहनी से हम दो बातें सीखने को मिलती है ,
पहली – हमें कभी इस तरह की बात नहीं करी चाहिए जो सही होते हुए भी गलत सन्देश दे।
दूसरी –किसी बात को सुनकर उस पर अपना विचार बनाने या प्रतिक्रिया देने से पहले एक बार सोच लेना चाहिए कि कहीं इस बात का कोई और पहलु तो नहीं है। संक्षेप में कहें तो हमे आधे सच से बचना चाहिए।

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