How Safe Are Indian Women: भारतीय महिलाएँ कितनी सुरक्षित..एक सामाजिक मसला

भारत में जहां महिलाओं को देवी का रूप मानकर पूजा की जाती है वहीं आये दिन गैंगरेप, हत्या, मार-पीट और घरेलू हिंसा जैसी बातें भी सुनें को मिलती है

21वीं सदी के इस आधुनिक भारतीय समाज में महिलाओं की अहमियत को आज किसी भी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.चाहें वह खेल जगत हो या उच्चतम शिक्षा,विज्ञान,इंजीनियरिंग,राजनीति,बैंक,कला आदि हर क्षेत्र में वे अपनी जिम्मेंदारी बखूबी निभाती मिल जाएंगी.जहाँ एक ओर आज की महिलाएँ समाज में अपनी भूमिका और अपने अस्तित्व को सशक्त करने के लिए मजबूती से आगे बढ़ रही हैं वहीं दूसरी तरफ हमारे देश में उनपर होने वाले अत्याचारों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही हैं.अभी हाल ही में हाथरस,उत्तर प्रदेश में हुई एक दलित महिला के साथ बलात्कार की घटना इसका ताजा उदाहरण है.

भारत में बढ़ता हुआ महिला अपराध

हमारी संस्कृति में जहाँ नारी को देवी दुर्गा,लक्ष्मी आदि-आदि विभिन्न नामों से पूजा-अर्चना की जाती है वहीं दूसरी तरफ उनके प्रति जघन्य अपराधों जैसे यौन हिंसा,दहेज के लिए हत्या,तेज़ाब फेंकना,जबरन वेश्यावृति,ऑनर किलिंग,भ्रूण हत्या,अपहरण,सामाजिक भेदभाव और मारपीट,घरेलू हिंसा आदि का उन्हें शिकार होना पड़ता हैं.आज की स्थिति यह है कि महिलाओं का हर स्वरुप चाहे वह एक 70 वर्षीय वृद्धा हो या 4-5 वर्ष की छोटी-सी बच्ची हो,सभी असुरक्षा की भावना में प्रतिदिन जी रहीं हैं.देश के हर कोनें की सड़कें,रेल,बस आदि सभी असुरक्षित और असामाजिक तत्वों के अड्डे बन गए हैं. भारतीय सविंधान में महिलाओं को भी पुरुषों के समान ही स्वतंत्र जीवन जीने का पूरा अधिकार है पर फिर भी, वें आज भी इस स्वतंत्र भारत में हर आयाम में सफलताओं की बुलंदियाँ छूने के बावजूद भी कुछ घटिया मानसिकता वाले लोगो की नजर में उनका कद बौना ही है.

महिला सुरक्षा से जुड़े हुए कुछ कानून

भारत में महिलाओं की और उनसे जुड़ी तमाम अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु बहुत से कानून बनाए गए है जिसमें हिंदू मैरिज एक्ट 1955,हिंदू विडो रिमैरिज एक्ट 1856,चाइल्ड मैरिज एक्ट 1929,मैटरनिटी बेनिफीट एक्ट 1861,मैरिड वीमेन प्रापर्टी एक्ट 1874,इंडियन डाइवोर्स एक्ट 1969,फॉरेन एक्ट 1969 मुस्लिम वुमन प्रोटेक्शन एक्ट 1986 ,क्रिस्चियन मैरिज एक्ट 1872,नेशनल कमिशन फॉर वुमन एक्ट 1990,सेक्सुअल हर्रासमेंट ऑफ़ वुमन एट वर्किंग प्लेस एक्ट 2013 आदि इनकी लिस्ट काफी लंबी हैं।इसके अलावा जुवेनाइल जस्टिस बिल में भी बदलाव किया गया है जिसके अंर्तगत यदि कोई 16 से 18 साल का किशोर जघन्य अपराध में लिप्त है उसे भी कठोर सजा का प्रावधान है(निर्भया केस के बाद).

आज की वर्तमान स्थिति क्या है

सरकार द्वारा कड़े कानून बनाए जाने के बावजूद भी महिलाओं की वर्तमान स्थिति हमारे देश में बेहद खराब है और यह बद से बदतर न हो इसके लिए सरकार और प्रत्येक व्यक्ति की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह महिलाओं की प्रतिष्ठा और गरिमा को बनाए रखने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें.हाल ही में (National Crime Records Bureau- NCRB) द्वारा किए गए 2016 के सर्वे में दिल्ली को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित बताया गया है.आज के इस सभ्य और विकसित होते समाज में यह स्थिति बहुत ही शर्मनाक है कि आज भी हर महिला असुरक्षा की भावना से जुझ रही हैं.हर दिन हमें महिला हिंसा से जुड़ी कुछ खबर पढ़ने को मिल ही जाती है. पिछले कुछ सालों में यौन हिंसा के अनगिनत घटनाओं ने आम जनता का ही नहीं बल्कि इंटरनेशनल मीडिया का भी ध्यान अपनी तरफ खिंचा है. सरकार द्वारा कुछ कड़े कानून बनाए जाने के बाद भी स्थिति सामान्य होने में और छोटी सोच वाले  लोगों की मानसिकता बदलने में अभी काफी समय लगेगा और यह तभी संभव होगा जब हम छोटी उम्र से ही अपने बच्चों में Gender  equality  की भावना को   विकसित करेंगे और हर व्यक्ति स्त्री-पुरूष में भेद करना बंद करें व उनको समान आदर दे.

 

महिला सुरक्षा से संबंधित एप्प

Twitter पर #yesallwomen मुहिम महिलाओं को उनपर होने वाले हिंसा के विरुध्द एक साथ लाने  के लिए ही चलाया गया.अब जबकि बहुत सारे एप्प लांच हो गए है जिनसे समय रहते सिर्फ Power Button से ही महिला की सही स्थिति का पता आसानी से लग सकता है.जैसे- VithU ,Circle Of 6 ,I’m Shakti ,Watch Over Me, Nirbhaya:Be Fearless आदि.इन एप्पों की मदद से कुछ हद तक महिलाएं अब राहत की सांस ले सकेंगी.

 

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