Marital Rape: आखिर पत्नी के साथ बलात्कार अवैध क्यों नहीं?

किसी भी महिला से उसकी इच्छा के बिना सेक्सुअल रिलेशनशिप बनाना Marital Rape यानी बलात्कार ही माना जाता है. कई देशो में यह कानूनन अपराध है, जिसके लिए सजा का प्रावधान है. लेकिन भारत में पति अपनी पत्नी की..

Marital Rape : हमारे देश में जहाँ रेप को महिलाओं के खिलाफ होने वालें जघन्य अपराध में गिनती की जाती है वहीं शादी के बाद अगर पति चार दीवार के अंदर रेप करने लगे तो इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाता.यह बात न केवल महिलाओं को शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी नुकसान पहुँचाती है.इसके अलावा कई देशों में तो Marital Rape को समाज में गैरकानूनी तक नहीं समझा जाता और इसे शादी के बाद ऐसा होना सामान्य समझा जाता है.

किसी भी महिला से उसकी इच्छा के बिना सेक्सुअल रिलेशनशिप बनाना रेप यानी बलात्कार ही माना जाता है. कई देशो में यह कानूनन अपराध है, जिसके लिए सजा का प्रवाधान है. लेकिन भारत में पति अपनी पत्नी की मर्जी के बिना उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करता है तो उसे अपराध नहीं माना जाता. यानी यहाँ भारत में वैवाहिक बलात्कार या मैरिटल रेप कानूनन अपराध के दायरे से बाहर है.

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“केंद्र सरकार ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध मानने से मना किया है और कहा है कि ऐसा करना विवाह की संस्था के लिए खतरनाक साबित होगा”.

दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट ने भी वैवाहिक बलात्कार को अपराध करार देने की मांग करने वाली याचिकाओं का निपटारा कर रही है। कोर्ट ने इस बारे में केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा है. जिसके जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि वैवाहिक बलात्कार को दंडनीय अपराध नहीं बनाया जा सकता है क्योंकि ऐसा करने से विवाह की संस्था के लिए खतरा होगा. यह एक ऐसा चलन बन सकता है कि, जो पतियों को प्रताड़ित करने का आसान -सा जरिया बन सकता है. केंद्र सरकार का मत है कि बहुत सारे पश्चिमी देशों में वैवाहिक बलात्कार अपराध की श्रेणी में है. लेकिन यह जरूरी नहीं है भारत में भी इसका अनुसरण किया जाए.

Marital Rape होने के कारण क्या है:

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अगर कोई महिला सेक्सुअल रिलेशनशिप के लिए मना कर देती है तो यह बात कुछ पतियों को बहुत बुरी लगती है.ज्यादातर लोग सेक्स के लिए महिलाओं की ना में भी हाँ ही समझते है. कई लोग समझते हैं कि जबरदस्ती करने से उन्हें आनंद ज्यादा मिलता है जोकि बिल्कुल ही गलत बात है.ऐसी मान्यताएं न केवल महिलाओं के लिए हानिकारक है बल्कि समाज के लिए भी है..वे समझते हैं कि हर महिला की जिम्मेदारी है कि वह अपने पति का साथ दें और अगर वे ऐसा नहीं कर पाती तो उन्हें लगता है कि या तो उनमें कुछ कमी है या उनकी पत्नी अच्छी नहीं या कोई और बात है. लगभग यह हर आदमी को लगता कि शादी के बाद उन्हें जबरन सेक्स करने का या रेप करने का लाइसेंस मिल जाता है. हिंदु मैरिज एक्ट के अनुसार पति और पत्नी की एक- दूसरे के प्रति कुछ जिम्मेदारियां हैं जिसमें दोनों को शारीरिक संबंध बनाने का अधिकार भी शामिल है। अदालत के कई ऐसे फैसले हैं जिसमें ये कहा गया है कि शारीरिक संबंध बनाने से मना करने पर भी जबरदस्ती करना क्रूरता है और इसे आधार बनाकर पति और पत्नी तलाक ले सकते हैं।

Marital Rape पर कानून क्या कहता है:

हिंदू मैरिज एक्ट 1955, मुस्लिम पर्सनल लॉ (Shariat)एपलिकेशन एक्ट 1937 और स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत डाईवोर्स और पति के ऊपर उत्पीड़न का आरोप नहीं लगाया जा सकता है.पिछले कुछ दशकों में बहुत से देशों ने वैवाहिक संबंध में पति द्वारा जबरदस्ती सेक्स को अपराध करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा से जुड़े घोषणापत्र में वैवाहिक बलात्कार को मानवाधिकार का उल्लंघन माना है.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन 104 देशों में वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित किया है, उनमें से 34 देशों ने इसे एक अलग तरह का अपराध माना है. जबकि बाकी देश इसे बलात्कार के दूसरे मामलों की तरह का ही अपराध मानते हैं.

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भारत में मैरिटल रेप को अपराध नहीं माना जाता हैं हालांकि दिल्ली के 2012 में निर्मम निर्भया बलात्कार कांड के बाद बनी ‘जस्टिस वर्मा कमेटी’ ने आईपीसी (IPC)की धारा 375 के तहत वैवाहिक बलात्कार में मिली छूट को खत्म करने की सिफारिश की थी. 2005 में घरेलू हिंसा कानून के

महिला संरक्षण अधिनियम में जो भारत की संसद में पारित हुआ था जिसका मकसद घर के अंदर घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाना ही था ..यह अधिनियम 26 अक्टूबर 2006 को लागू हुआ था.इस कानून के तहत घर के भीतर यौन शोषण को परिभाषित किया गया है. जिसके तहत घरेलू हिंसा के दायरे में और भी अनेक प्रकार की हिंसा और दुर्व्यवहार आते हैं. इसमें लैंगिक शोषण जैसे बलात्कार और बलपूर्वक बनाए गए शारीरिक संबंध भी शामिल हैं.

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एक एडिशनल सेशन जज Dr. Kamini Lau ने भी Marital Rape से जुड़े केस की जाँच की और कहा :

“Non recognition of marital rape in India, a nation set upon the bedrock of equality, is gross double standard and hypocrisy in law which is central to the subordination and subjugation of women.” “We in India are yet to recognize the woman’s right to control marital intercourse as a core component of equality” and emphasized that the “woman has full autonomy over her body, recognition of marital rape and offensive sexual acts, and raising our voices against it is the first crucial step towards achieving substantial equality between man and woman.” “Marital rape is offensive to morality and liberty and any kind of sexual perversity is required to be exposed, addressed and condemned.”

 

इसीलिए हमारे देश की दंड संहिता भी जागे और दूसरे देशों की तरह इसके खिलाफ एक सख्त कानून बनाए जिससे हमारे देश की महिलाऐं भी अपने स्वाभिमान की रक्षा कर सकें और सुरक्षित रह सकें.

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